पटना हाईकोर्ट ने सात वर्ष से कम सजा वाले मामलों में अभियुक्त की गिरफ्तारी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए जमुई के तत्कालीन एसपी, एसडीपीओ और एसएचओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया है।न्यायालय ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित एसएचओ को किसी भी मामले के अनुसंधान की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाए।मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने तत्कालीन जांच अधिकारी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने को गंभीर माना और इसे दीवानी अवमानना के दायरे में लेते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया।कोर्ट ने संबंधित एसएचओ को आठ सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।यह मामला कुमार दुष्यंत द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद सात वर्ष से कम सजा वाले मामले में अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।बताया गया कि 20 जुलाई 2020 को जमुई टाउन थाना में एक शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें फेसबुक अकाउंट हैक कर आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप था।हाईकोर्ट के इस सख्त रुख को कानून के पालन और नागरिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

