भागलपुर, संवाददाता।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर अब भारत की आम जनता पर साफ दिखने लगा है। कमर्शियल एलपीजी की कमी और कच्चे माल की महंगाई ने देश के प्लास्टिक उद्योग की कमर तोड़ दी है, जिसके चलते हजारों यूनिट बंद हो चुकी हैं।देशभर में करीब 20 हजार छोटे उद्योगों के बंद होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि 50 हजार से अधिक प्लास्टिक फैक्ट्रियां प्रभावित हुई हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस की कमी के कारण उत्पादन लगभग ठप हो गया है। कई जगहों पर यूनिट्स ने उत्पादन घटा दिया है या पूरी तरह बंद कर दिया है।पिछले 30 दिनों में प्लास्टिक के कच्चे माल यानी पॉलिमर की कीमतों में 50 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। एलडीपीई जैसे प्रमुख प्लास्टिक दानों की कीमत 110 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 180 रुपये तक पहुंच गई है। अन्य कच्चे माल की कीमतों में भी भारी उछाल दर्ज किया गया है।इसका सीधा असर बाजार में दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल महीने में प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में 50 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। प्लास्टिक टंकी और कंटेनर जैसे उत्पाद 30 से 40 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं।इस संकट का असर केवल उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के सामानों पर भी पड़ने वाला है। एफएमसीजी सेक्टर में 3 से 4 प्रतिशत तक मूल्य वृद्धि की संभावना है, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे एसी और फ्रिज के दाम पहले ही 15 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।एलपीजी की कमी के चलते शहरी इलाकों में लोगों की जीवनशैली भी बदल रही है। इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री सामान्य से 10 गुना तक बढ़ गई है, जबकि रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।उद्योग संगठनों ने सरकार से राहत की मांग की है। ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अनुसार, इस क्षेत्र से लगभग 5 लाख लोग जुड़े हैं और यदि स्थिति नहीं सुधरी तो 2 से 3 लाख लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा सकता है। संगठन ने प्लास्टिक उत्पादों पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने और बैंकों से वर्किंग कैपिटल लिमिट बढ़ाने की मांग की है।इस बीच रुपये की कमजोरी और तेल आयात पर निर्भरता ने संकट को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

