भागलपुर न्यूज नेटवर्क, भागलपुर
जिले के सदर SDO कार्यालय में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब निगरानी विभाग की टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा कर दिया। टीम ने क्लर्क प्रेम कुमार और कर्मचारी मयंक को 70 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया।
जानकारी के अनुसार, एक कर्मचारी ने अपनी सेवा संपुष्टि (Service Confirmation) के लिए आवेदन दिया था। इसी काम के एवज में मयंक ने 70 हजार रुपये और प्रेम कुमार ने 50 हजार रुपये की डिमांड की थी। परेशान होकर शिकायतकर्ता ने निगरानी विभाग से संपर्क किया।
शिकायत मिलते ही विभाग ने मामले का सत्यापन कराया—और आरोप पूरी तरह सही पाए गए। इसके बाद 9 सदस्यीय विशेष टीम गठित की गई, जिसने सोमवार को जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान रिश्वतखोरी की रिकॉर्डिंग भी टीम के पास मौजूद है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार क्लर्क प्रेम कुमार पहले से ही चर्चित सृजन घोटाले का आरोपी रह चुका है। उस पर SIT की गोपनीय जानकारी घोटालेबाजों तक पहुंचाने का गंभीर आरोप था। इसी मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने उसे गिरफ्तार कर पटना के Beur Jail में करीब 6 महीने तक जेल में रखा था। बाद में उसे राहत मिली और हैरानी की बात यह कि जेल से बाहर आने के बाद उसे फिर से सरकारी कार्यालय में पोस्टिंग दे दी गई—और वह सदर SDO कार्यालय में पदस्थापित था।
मयंक भी पहले DM कार्यालय में कार्यरत रह चुका है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे समाहरणालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल है। एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर भ्रष्टाचार के आरोपियों को सिस्टम में दोबारा जगह कैसे मिल रही है—और कब तक आम लोगों से उनके हक के लिए इस तरह रिश्वत वसूली होती रहेगी?

