भागलपुर, विशेष संवाददाता।
वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और अस्थिर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भारत अब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक उभरते केंद्र के रूप में सामने आ रहा है। इसी कड़ी में भागलपुर स्थित ट्रिपल आईटी (IIIT) विदेशी छात्रों की नई पसंद बनता जा रहा है। संस्थान में पहली बार विदेशी छात्रों के लिए 65 सीटें स्वीकृत की गई हैं, जो इस बदलते रुझान का स्पष्ट संकेत है।पश्चिम एशिया सहित कई देशों में जारी संघर्ष और अस्थिरता के कारण वहां की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। विश्वविद्यालयों में अनिश्चितता बढ़ी है, परीक्षाएं बाधित हुई हैं और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में विदेशी छात्र अब सुरक्षित और स्थिर विकल्प के रूप में भारत की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि देश में विश्वस्तरीय शिक्षा, अनुसंधान सुविधाएं और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो यह प्रवृत्ति ‘ब्रेन गेन’ में बदल सकती है।इस वर्ष इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन में लगभग 14.5 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। इसे केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि विदेशों में घटते अवसरों का संकेत भी माना जा रहा है।ट्रिपल आईटी भागलपुर के पीआरओ पिंटू सिन्हा के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इस बार विदेशी छात्रों के लिए स्वीकृत सीटें भरने की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि पूर्व में कई छात्र यहां नामांकन लेने के बाद विदेश में अवसर मिलने पर पढ़ाई छोड़ देते थे, जिससे सीटें रिक्त रह जाती थीं, लेकिन वर्तमान हालात में इस प्रवृत्ति में बदलाव की उम्मीद है। विदेशी छात्रों का नामांकन डीएएसए यूजी (Direct Admission of Students Abroad) के माध्यम से किया जाएगा, जिसकी काउंसलिंग जेईई मेन के आधार पर होगी। खाड़ी देशों में सीबीएसई और आईएससी बोर्ड परीक्षाओं के प्रभावित होने के कारण वहां के छात्र भी अब भारत में शिक्षा के अवसर तलाश रहे हैं।

