मुंबई/नई दिल्ली, संवाददाता।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,636 अंक टूटकर 71,947 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488 अंक गिरकर 22,331 के स्तर पर आ गया।इस गिरावट के साथ ही बाजार लगभग दो साल पुराने स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले 14 फरवरी 2024 को सेंसेक्स 71,822 पर बंद हुआ था।विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि ने निवेशकों के बीच महंगाई को लेकर चिंता पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर बाजार पर देखने को मिला।ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.41 डॉलर बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। युद्ध शुरू होने से पहले इसकी कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी। इस तरह महज एक महीने में तेल की कीमतों में लगभग 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।तेल की कीमतों में इस उछाल का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में आयात बिल बढ़ने और महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।इस बीच रुपये में भी कमजोरी देखी गई है। रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जिससे आयात महंगा होने का खतरा और बढ़ गया है। हालांकि, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को अतिरिक्त डॉलर बेचने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसका प्रभाव सीमित रहा।बाजार में गिरावट का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी पड़ा, जहां बीएसई के दोनों इंडेक्स करीब 2.6 प्रतिशत तक टूट गए।वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई 2.8 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 3 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसैंग 0.8 प्रतिशत गिर गया। हालांकि, यूरोपीय बाजार मामूली बढ़त के साथ खुले और अमेरिकी फ्यूचर्स हरे निशान में रहे।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव बना रहता है और तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

