एक ही भवन, दो दावे: ‘भव्य उद्घाटन’ या ‘अवैध निर्माण’? भागलपुर डीबीए में मचा घमासान

भागलपुर न्यूज नेटवर्क, भागलपुर
भागलपुर के जिला बार एसोसिएशन परिसर में नव-निर्मित लॉयर्स ब्लॉक-कम-लाइब्रेरी के उद्घाटन ने अब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां इसे अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक सुविधा से लैस “ऐतिहासिक कदम” बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इसे “अवैध निर्माण” करार देते हुए सीधे-सीधे कानून की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया गया है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन सह राज्यसभा सदस्य मनन कुमार मिश्रा ने फीता काटकर और दीप प्रज्वलित कर इस भवन का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे। मंच से इसे अधिवक्ताओं के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं वाला केंद्र बताया गया, जो उनके कार्य को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बिरेश प्रसाद मिश्रा और महासचिव अंजनी कुमार ने इस परियोजना को अधिवक्ताओं के हित में “मील का पत्थर” बताया और कहा कि इससे न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

लेकिन यहीं से शुरू हुआ असली विवाद…

उद्घाटन के कुछ ही समय बाद “जिला विधिज्ञ संघ बचाओ संघर्ष समिति” ने इस पूरे निर्माण को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। समिति का आरोप है कि यह भवन अवैध रूप से बनाया गया है और प्रशासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद इसका उद्घाटन कराया गया।
महासचिव कपिल देव कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तीखा हमला बोलते हुए कहा— “यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि कानून के मंदिर में ही कानून का मजाक उड़ाया गया है।”

सत्ता बनाम कानून? उठे गंभीर सवाल

संघर्ष समिति ने सवाल उठाया है कि जब न्यायालय परिसर में ही नियमों को दरकिनार किया जाएगा, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा? उनका कहना है कि यह मामला यह साबित करता है कि प्रभावशाली लोगों के लिए कानून कोई मायने नहीं रखता।
समिति ने यह भी आरोप लगाया कि जिला प्रशासन के आदेशों की अनदेखी करते हुए इस कार्यक्रम को अंजाम दिया गया, जो सीधे-सीधे प्रशासनिक अवहेलना है।

अब लड़ाई कोर्ट तक पहुंचेगी

मामले को लेकर संघर्ष समिति ने सख्त रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि इस पूरे प्रकरण को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। रिट याचिका दायर कर इस निर्माण और उद्घाटन की वैधता पर सवाल उठाए जाएंगे।

एक ही भवन… लेकिन दो सच्चाई!

एक पक्ष—विकास, आधुनिकता और सुविधा का दावा
दूसरा पक्ष—अवैध निर्माण और कानून के खुले उल्लंघन का आरोप। अब देखना यह है कि सच किसके साथ है—और फैसला अदालत में क्या आता है।

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“जब न्याय के मंदिर में ही कानून टूटे, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?”

भागलपुर के जिला विधिज्ञ संघ परिसर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे न्याय व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। “जिला विधिज्ञ संघ बचाओ संघर्ष समिति” के महासचिव कपिलदेव कुमार ने आरोप लगाया है कि राज्य सभा सदस्य मनन मिश्रा के द्वारा कोर्ट परिसर में ही अवैध भवन निर्माण का उद्घाटन कर कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ा दी गईं।
समिति के महासचिव कपिल देव कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जिस जगह पर आम लोगों को न्याय की उम्मीद होती है, वहीं पर सत्ता के ताकतवर लोग नियमों को कुचलते नजर आ रहे हैं।
“अगर ताकत है तो अपराध भी अपराध नहीं?”
जिला विधिज्ञ संघ बचाओ संघर्ष समिति ने तीखा हमला करते हुए कहा है कि यह घटना साफ दिखाती है कि अगर कोई संगठित और प्रभावशाली व्यक्ति अपराध करता है, तो प्रशासन और कानून उसके सामने बेबस हो जाते हैं। कोर्ट परिसर में अवैध शिलान्यास कर यह संदेश दिया गया है कि “पावरफुल लोगों के लिए कानून मायने नहीं रखता।”
प्रशासन के आदेश भी बेअसर!
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद इस अवैध निर्माण का शिलान्यास किया गया। इसे सीधे-सीधे प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना और कानून का मजाक बताया जा रहा है।
एक तरफ नगर आयुक्त शहर में अवैध निर्माण पर कार्रवाई की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद न्यायालय परिसर में नियमों की धज्जियां उड़ती दिख रही हैं।

“छोटे नेता से लेकर सांसद तक, सब कानून तोड़ने में आगे!”
संघर्ष समिति ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक खतरनाक ट्रेंड है—जहां छोटे नेताओं से लेकर सांसद तक कानून तोड़ने में पीछे नहीं हैं। यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा है।

अब होगी कोर्ट में सीधी लड़ाई
इस पूरे मामले को लेकर संघर्ष समिति ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने ऐलान किया है कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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